जयपुर, 28 जनवरी।
जयपुर में पहली बार दिगम्बर जैन चतुर्विद संघ के सानिध्य में आयोजित आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत श्री श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मानसरोवर के वीटी रोड, शिप्रा पथ स्थित हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड में चल रहे इस अनुष्ठान में बुधवार को 226 अर्घ्य अर्पित किए गए।
अंतर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “धर्म करना सरल है, लेकिन उसे निभाना अत्यंत कठिन है। नियम लेना आसान है, पर उसका पालन करना कठिन। धर्म दबाव में नहीं, बल्कि अंतरात्मा की खुशी से होना चाहिए। त्याग रोगी बनकर नहीं, योगी बनकर करना चाहिए।”
उन्होंने अपरिग्रह और रात्रि भोजन त्याग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये व्रत आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
इससे पूर्व उपाध्याय पियूष सागर महाराज ने कहा कि “एक जलता हुआ दीपक लाखों दीपक जला सकता है, लेकिन बुझा हुआ दीपक किसी को प्रकाश नहीं दे सकता। इसलिए वाणी और व्यवहार दोनों को संयमित रखना आवश्यक है।”
बुधवार को 5700 से अधिक श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से झूमते-नाचते हुए चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान की पूजा में सहभागिता की। भजनों “छोटा सा मंदिर बनाएंगे…” और “उड़ती पूरबिया संदेशों म्हारो लेती जाईज्यों रे…” पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
प्रातः प्रतिष्ठाचार्य बा. ब्र. तरुण भैय्या (इंदौर) के निर्देशन में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके बाद नवदेवता पूजा, आकिंचन्य महाव्रत पूजा में 216 अर्घ्य तथा रात्रि भुक्ति त्याग व्रत पूजा में 10 अर्घ्य अर्पित किए गए।
आचार्य प्रसन्न सागर महाराज दो दिवसीय उपवास के बावजूद प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक लगातार 17 घंटे धर्म प्रभावना कर रहे हैं। समिति के कोषाध्यक्ष कैलाश चंद छाबड़ा ने बताया कि भगवान महावीर के बाद सिंहनिष्क्रीडित व्रत के अंतर्गत 557 दिन की मौन साधना और 12 हजार से अधिक उपवास करने वाले आचार्य श्री के सान्निध्य में यह आयोजन 13 वर्षों बाद जयपुर में हो रहा है।
सायंकाल गुरु भक्ति, आनंद यात्रा एवं 108 दीपकों से महाआरती का आयोजन हुआ। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष सुभाष चंद जैन, महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समिति पदाधिकारी मौजूद रहे।
31 जनवरी तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, चारित्र शुद्धि विधान पूजा, धर्मसभा, पाद पक्षालन, गुरु पूजा एवं प्रतिक्रमण आयोजित होंगे।
पहली बार होगा विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर
आचार्य श्री ससंघ के सानिध्य में 1 फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें 1 से 25 वर्ष के विवाहित दंपतियों को वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, संयम और संस्कारों की जानकारी दी जाएगी।
