गुणीजन संगीत समारोह का समापन बसंत पंचमी पर सजा सूफियाना कलामों का गुलदस्ता लेखन और कला के क्षेत्र में दिए गए पुरस्कार

 



जयपुर।

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर साम्प्रदायिक सौहार्द और आध्यात्मिक वातावरण के बीच कलाकारों ने सूफियाना कलामों का ऐसा गुलदस्ता सजाया कि श्रोता भाव-विभोर हो उठे। मौका था स्वागत जयपुर फाउंडेशन और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की सहभागिता से आयोजित गुणीजन संगीत समारोह का, जो जवाहर कला केंद्र में संपन्न हुआ।

वरिष्ठ कलाविद् एवं कला समीक्षक स्व. श्रीगोपाल पुरोहित और वरिष्ठ ध्रुवपद गायक स्व. उस्ताद सईदद्दीन खां डागर की स्मृति में आयोजित इस समारोह में जयपुर के प्रसिद्ध कव्वाल उस्ताद हमीद साबरी ने अपने साथियों के साथ सूफियाना कलामों की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने प्रसिद्ध आध्यात्मिक रचना “तू दैरो हरम का मालिक है…” से की। इसके बाद “भर दो झोली मेरी या मोहब्बत…”, “मन कुंतो मौला फ़-हाज़ा अली मौला…”, “कृपा करो महाराज…”, और “ऐरी सखि मोहे पिया घर आए…” जैसी रचनाओं ने माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया




समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सैयद हबीर्बुरहमान नियाजी ने कहा कि बसंत केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि वह अवसर है जहां सूफी रहस्यवाद और लोक परंपराएं मिलकर मजहबी दीवारों को धुंधला कर देती हैं। यह गुरु-शिष्य परंपरा और आपसी प्रेम का उत्सव है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. एल.सी. भारतीय, रत्न व्यवसायी संजय काला और आकाशवाणी की पूर्व सहायक केंद्र निदेशक रेशमा खान उपस्थित रहीं।



नियाजी, कावा, दीपक और स्वाति को मिला सम्मान

समारोह के दौरान श्रीगोपाल पुरोहित लेखन पुरस्कार डॉ. सैयद हबीर्बुरहमान नियाजी को तथा कला पुरस्कार वरिष्ठ कलाकार उस्ताद हामिद खान कावा को प्रदान किया गया। वहीं संगीत रचनाकार दीपक माथुर और कथक नृत्यांगना स्वाति अग्रवाल को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

स्वागत जयपुर फाउंडेशन के चेयरमैन इकबाल खान ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन रहमान हरफनमौला ने किया।

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